एक साल काम करने पर फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को ग्रेचुइटी मिलेगी, 21 नवंबर 2025 को घोषित नया श्रम कोड

एक साल काम करने पर फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को ग्रेचुइटी मिलेगी, 21 नवंबर 2025 को घोषित नया श्रम कोड

मीनाक्षी रस्तोगी नव॰. 24 0

21 नवंबर 2025 को भारत सरकार ने श्रम क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की — श्रम मंत्रालय ने घोषणा की कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी अब केवल एक साल की निरंतर सेवा के बाद ही ग्रेचुइटी के पात्र होंगे। यह बदलाव पिछले 53 सालों में सबसे बड़ा श्रम सुधार है, जिसमें 29 पुराने कानूनों को चार सरल श्रम कोड में विलय किया गया है। यह निर्णय न केवल फैक्ट्रियों और रेलवे जैसे संगठनों में काम करने वाले लाखों अस्थायी कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद का संकेत है, बल्कि यह भारत के श्रम बाजार की गहरी असमानताओं को सुधारने की ओर एक बड़ा कदम भी है।

क्यों बदला गया नियम?

पिछले 53 सालों से, ग्रेचुइटी पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम पांच साल एक ही संगठन में काम करना जरूरी था। लेकिन आज के बाजार में, अधिकांश नौकरियां अस्थायी होती हैं — एक प्रोजेक्ट के लिए तीन महीने, एक निर्माण कार्य के लिए छह महीने, या एक फैक्ट्री में चार महीने। ऐसे में, जब एक कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़ता है, तो उसकी सेवाओं का एक भी भुगतान नहीं मिलता। यही कारण था कि श्रम मंत्रालय ने इस नियम को बदलने का फैसला किया। यह बदलाव न केवल न्याय की मांग है, बल्कि यह अस्थायी भर्ती के दुरुपयोग को रोकने का एक तरीका भी है।

ग्रेचुइटी कैसे गणना की जाएगी?

ग्रेचुइटी की गणना अब भी वही फॉर्मूला अपनाया जाएगा: अंतिम वेतन × (15/26) × सेवा के वर्ष। यहां अंतिम वेतन में बेसिक पे और डियरनेस एलोंस (DA) शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का अंतिम वेतन ₹30,000 है, तो एक साल के बाद उसे ₹17,307 मिलेंगे — यह गणना टाइम्सबुल द्वारा पुष्टि की गई है। अगर कोई कर्मचारी ₹50,000 वेतन पर पांच साल काम करता है, तो उसे ₹1,44,230 मिलेंगे। यह गणना 26 दिनों के आधार पर की जाती है, क्योंकि यह औसतन एक महीने में काम के दिनों की संख्या है।

लेकिन ध्यान दें — यह गणना केवल उन्हीं कर्मचारियों पर लागू होती है जो पेमेंट ऑफ ग्रेचुइटी एक्ट, 1972 के अंतर्गत आते हैं। यह एक्ट ऐसे संगठनों को कवर करता है जिनमें 10 या अधिक कर्मचारी हों। गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए ग्रेचुइटी की अधिकतम सीमा ₹10 लाख है, जबकि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए यह ₹25 लाख तक बढ़ गई है।

किन लोगों को फायदा होगा?

यह बदलाव सिर्फ फैक्ट्री या रेलवे के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इसका फायदा गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, माइग्रेंट मजदूर और महिला श्रमिकों तक पहुंचेगा। अब एक ऑटो ड्राइवर, एक फूड डिलीवरी व्यक्ति, या एक निर्माण साइट पर काम करने वाला मजदूर — अगर वह एक साल तक निरंतर रूप से काम करता है — तो वह भी ग्रेचुइटी पाने का हकदार होगा। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक ये लोग श्रम सुरक्षा के बाहर रहे।

क्या यह सब तुरंत लागू होगा?

क्या यह सब तुरंत लागू होगा?

हां। श्रम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम 21 नवंबर 2025 से तुरंत लागू हो जाएगा। अगर कोई कर्मचारी इस तारीख के बाद एक साल पूरा करता है, तो उसे ग्रेचुइटी देना अब कानूनी दायित्व होगा। यह नियम अस्थायी भर्ती को बढ़ावा देने के बजाय, सीधी भर्ती को प्रोत्साहित करेगा। जैसा कि एनडीटीवी ने रिपोर्ट किया, यह बदलाव "अत्यधिक अनुबंधीकरण को कम करेगा"।

इससे पहले क्या होता था?

1972 के पेमेंट ऑफ ग्रेचुइटी एक्ट के अनुसार, ग्रेचुइटी केवल तभी दी जाती थी जब कर्मचारी पांच साल पूरे करता था — या तो रिटायरमेंट, नियुक्ति के बाद त्यागपत्र देने, या मृत्यु/अकाल बाधा के मामले में। अगर कोई तीन साल काम करके चला जाता था, तो उसे कुछ भी नहीं मिलता था। यही कारण था कि कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को छह महीने के अनुबंध पर रखती थीं — ताकि वे पांच साल पूरे न कर पाएं।

इसके अलावा, ऋतु आधारित उद्यमों जैसे चीनी मिलों या फलों के बाजारों में, ग्रेचुइटी की गणना सात दिनों के वेतन के आधार पर की जाती थी। अब यह सब एक समान हो गया है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

श्रम नीति विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा राठौड़ का कहना है, "यह एक न्यायपूर्ण बदलाव है। अब एक कर्मचारी को अपनी सेवाओं के लिए एक भुगतान मिलेगा, चाहे वह एक वर्ष के लिए काम करे। यह उसके आत्मसम्मान को बढ़ाएगा।"

लेकिन कुछ व्यापार संघ चिंतित हैं। एक फैक्ट्री मालिक ने अनाम रूप से कहा, "हम अब अस्थायी कर्मचारियों को रखने में डरेंगे। एक साल के बाद उन्हें ग्रेचुइटी देना होगा — यह हमारे लिए लागत बढ़ा देगा।"

अगला कदम क्या है?

अब श्रम मंत्रालय ने एक नए डिजिटल पोर्टल की घोषणा की है — जहां कर्मचारी अपनी सेवा की अवधि, वेतन और ग्रेचुइटी की गणना को ट्रैक कर सकेंगे। यह पोर्टल 1 दिसंबर 2025 से लाइव होगा। इसके साथ ही, राज्य सरकारों को इस नियम को लागू करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

यह बदलाव सिर्फ एक भुगतान का मुद्दा नहीं है। यह एक नए श्रम संस्कृति की शुरुआत है — जहां कोई भी कर्मचारी, चाहे वह एक दिन के लिए नौकरी करे, उसे उसकी सेवाओं का सम्मान मिले।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ग्रेचुइटी केवल सरकारी नौकरियों में ही मिलेगी?

नहीं, यह नियम सभी उद्यमों पर लागू होगा जिनमें 10 या अधिक कर्मचारी हों — चाहे वे सरकारी हों या निजी। निजी कंपनियों के लिए ग्रेचुइटी की अधिकतम सीमा ₹10 लाख है, जबकि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए यह ₹25 लाख तक है।

क्या अगर मैं एक साल से कम समय तक काम कर चुका हूं, तो क्या मुझे कुछ मिलेगा?

नहीं, अगर आपने एक साल से कम समय तक काम नहीं किया है, तो आपको ग्रेचुइटी नहीं मिलेगी। लेकिन अगर आप दुर्घटना या बीमारी से अकाल बाधित हो गए हैं, तो इस सीमा का पालन नहीं किया जाता। ऐसे मामलों में ग्रेचुइटी तुरंत दी जाती है।

क्या ग्रेचुइटी का भुगतान बैंक खाते में ही होगा?

हां, श्रम मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि ग्रेचुइटी का भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में होगा। यह भुगतान अनुबंध समाप्ति के 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। देरी होने पर ब्याज लगेगा।

क्या यह बदलाव गैर-संगठित क्षेत्र में भी लागू होगा?

हां, यह बदलाव गिग वर्कर्स और माइग्रेंट मजदूरों तक भी फैलेगा, लेकिन इसके लिए राज्य सरकारों को अपने स्तर पर नियम बनाने होंगे। पहले चरण में, यह निजी कंपनियों और सरकारी संस्थानों में लागू होगा।

क्या अगर मैं एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाऊं, तो मेरी सेवा का समय जुड़ेगा?

नहीं, ग्रेचुइटी केवल एक ही संगठन में निरंतर सेवा के आधार पर दी जाती है। अगर आप कंपनी बदलते हैं, तो पिछली कंपनी में आपकी सेवा का समय नहीं जुड़ेगा। लेकिन नई कंपनी में एक साल पूरा करने पर आपको वहां ग्रेचुइटी मिलेगी।

क्या यह नियम अभी तक काम कर रहे कर्मचारियों को भी लागू होगा?

हां, यह नियम वापसी के साथ लागू होगा। अगर कोई कर्मचारी 21 नवंबर 2025 से पहले से ही काम कर रहा है और अब एक साल पूरा कर रहा है, तो उसे उसकी पूरी सेवा के लिए ग्रेचुइटी मिलेगी।

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